डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में इन दिनों CTV यानी Connected TV का जितना शोर है, उतना शायद ही किसी और चीज़ का हो। हर कोई बात कर रहा है-कैसे कुकीलेस एरा में CTV ही आखिरी उम्मीद है, कैसे डिवाइस-बेस्ड टार्गेटिंग आपको सीधे सही ऑडियंस तक पहुँचाती है, कैसे लाखों डॉलर का बजट इसी पर लगाया जा रहा है।
लेकिन मैं आपको एक दूसरी तस्वीर दिखाना चाहता हूँ। एक ऐसी तस्वीर जिस पर शायद ही कभी चर्चा होती हो। मैं खुद अमेरिका में डिजिटल मार्केटिंग करता हूँ, और पिछले कुछ सालों में मैंने देखा है कि हम सब एक बड़े भ्रम में जी रहे हैं। हमें लगता है कि डिवाइस आईडी से हम सटीक टार्गेटिंग कर रहे हैं, जबकि असल में हम अंधों में हाथी का पैर टटोल रहे होते हैं।
यह पोस्ट उसी भ्रम को तोड़ेगी। यह आपको बताएगी कि CTV डिवाइस टार्गेटिंग क्यों उतनी सटीक नहीं है जितना हमें लगता है, और इस वास्तविकता को स्वीकार करके आप अपनी अगली मार्केटिंग रणनीति को कैसे और तेज़ बना सकते हैं।
डिवाइस आईडी: एक पते पर पूरा मोहल्ला
बात को थोड़ा मूर्त रूप देते हैं। मान लीजिए, आपके घर में एक स्मार्ट टीवी है-मान लीजिए, कोई आम Samsung या LG जिसमें Roku या Fire TV लगा है। उस टीवी की एक डिवाइस आईडी है, मसलन Roku_ABC123। अब सोचिए, दिन भर में उस डिवाइस का उपयोग कितने लोग करते हैं।
सुबह 7 बजे: आप जागते हैं और चाय बनाते हुए समाचार देखते हैं। 9 बजे: आपके बच्चे स्कूल जाने से पहले पाँच मिनट के लिए Cartoon Network का कोई शो देख लेते हैं। दोपहर 3 बजे: आपकी पत्नी गृहिणी हैं और अपनी पसंदीदा वेब सीरीज़ चला लेती हैं। शाम 7 बजे: पूरा परिवार इकट्ठा होता है और कोई फिल्म देखता है। रात 11 बजे: आप अपने बेडरूम में गए, लेकिन लिविंग रूम का टीवी बंद नहीं हुआ-आपका किशोर बेटा गेमिंग वीडियो देख रहा है।
अब बताइए-क्या उसी डिवाइस आईडी Roku_ABC123 को टार्गेट करके आप किसी एक विशिष्ट व्यक्ति तक पहुँच सकते हैं? बिल्कुल नहीं। डिवाइस आईडी सिर्फ एक पता है, एक हाउसहोल्ड का पता, न कि एक व्यक्ति की पहचान। यही सबसे बड़ी भ्रांति है-हम डिवाइस को एक "लॉगिन" समझते हैं, जबकि वह तो एक साझा परिवार के बैठकखाने की तरह है।
मैंने कई क्लाइंट्स को देखा है-खासकर अमेरिकी बाजार में काम करने वाले ब्रांड्स को-जो अपनी CTV रणनीति को "प्रिसीज़न टार्गेटिंग" का नाम देते हैं। वे कहते हैं, "डिवाइस आईडी से हम सही जगह पर विज्ञापन डाल रहे हैं।" लेकिन जब मैं उनके डेटा को देखता हूँ, तो पाता हूँ कि उनके विज्ञापन उन लोगों तक पहुँच रहे हैं जो उनके ब्रांड से कोई मतलब नहीं रखते। और यह पैसे की बर्बादी है।
फॉल्स प्रिसीज़न: जब सटीकता सिर्फ एक दिखावा हो
अमेरिकी मार्केटिंग जगत में एक शब्द बहुत चलन में है-"प्रिसीज़न टार्गेटिंग"। लेकिन मैं इसे "फॉल्स प्रिसीज़न" कहता हूँ। क्योंकि डिवाइस-स्तरीय डेटा आपको एक नकली सटीकता देता है जो वास्तविकता में मौजूद नहीं है।
नीलसन की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 60% CTV कंटेंट एक से अधिक दर्शकों द्वारा एक साथ देखा जाता है। यानी, जब आप अपना विज्ञापन उस डिवाइस पर दिखाते हैं, तो अक्सर उस स्क्रीन के सामने दो या तीन लोग होते हैं-जिनकी उम्र, लिंग, और रुचियाँ बिल्कुल अलग-अलग हो सकती हैं। इस स्थिति में, आपकी टार्गेटिंग एक तीर से तीन पक्षियों को निशाना लगाने जैसी होती है-आप शायद कोई न कोई मार ही लें, पर निशाना सटीक नहीं रहता।
एक विशेष उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए, आप एक प्रीमियम कार ब्रांड हैं जो 40-55 वर्ष के उच्च-आय वाले पुरुषों को टार्गेट करना चाहता है। आप एक ऐसी डिवाइस आईडी खरीदते हैं जो आपकी "परफेक्ट ऑडियंस" दिखाती है-वह डिवाइस अक्सर न्यूज़ चैनल, बिज़नेस शो और लक्ज़री कंटेंट देखती है। आपको लगता है कि आप सही जगह पर हैं। पर जब आपका विज्ञापन शनिवार दोपहर को चलता है, तो उस स्क्रीन के सामने 12 साल का बच्चा YouTube पर Minecraft वीडियो देख रहा होता है-क्योंकि उसके पिता ने उसी दिन सुबह न्यूज़ देखा था और डिवाइस का कंटेंट हिस्ट्री बदल चुका है।
यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। मैंने खुद अपने एक क्लाइंट के साथ इस तरह का मामला देखा है। उसने CTV पर भारी बजट लगाया, लेकिन कन्वर्ज़न रेट उम्मीद से बहुत कम रहा। कारण? वह एक डिवाइस को एक व्यक्ति मान रहा था, जबकि वह डिवाइस एक पूरे परिवार का साझा मनोरंजन केंद्र था।
अमेरिकी बाजार का एक अनदेखा पैटर्न
अमेरिका में CTV का उपयोग दुनिया के किसी भी देश से अलग है। यहाँ लोगों के पास एक से अधिक स्क्रीन होती हैं-लिविंग रूम में एक बड़ा टीवी, बेडरूम में एक मध्यम टीवी, और बच्चों के कमरे में एक छोटा टीवी या टैबलेट। हर डिवाइस का अपना एक अलग व्यूइंग पैटर्न होता है, लेकिन सभी एक ही डिवाइस आईडी से लिंक नहीं होते।
दिलचस्प बात यह है कि डिवाइस टार्गेटिंग में समय का बहुत बड़ा रोल है, लेकिन अधिकांश मार्केटर्स इसे अनदेखा करते हैं। आइए देखते हैं कि अमेरिकी घरों में आमतौर पर CTV कैसे इस्तेमाल होता है:
- सुबह (6 AM - 9 AM): वयस्क सुबह का नाश्ता करते हुए समाचार या मॉर्निंग शो देखते हैं। इस समय बच्चे स्कूल की तैयारी में व्यस्त होते हैं। यहाँ टार्गेटिंग समाचार-प्रेमी वयस्कों के लिए अच्छी हो सकती है, लेकिन बच्चों के लिए नहीं।
- दोपहर (12 PM - 3 PM): स्कूल से घर आने के बाद बच्चे अक्सर कार्टून या गेमिंग वीडियो देखते हैं। कामकाजी माता-पिता घर पर नहीं होते। यह समय बच्चों को टार्गेट करने के लिए सबसे उपयुक्त है।
- शाम (7 PM - 9 PM): पूरा परिवार एक साथ डिनर करते हुए कोई शो या फिल्म देखता है। यह समय फैमिली-फ्रेंडली विज्ञापनों के लिए बेस्ट है, लेकिन हाई-एंड प्रोडक्ट्स के लिए नहीं।
- रात (10 PM - 1 AM): बच्चे सो जाते हैं, और वयस्क अपने बेडरूम के टीवी पर अपनी पसंदीदा सीरीज़ या नेटफ्लिक्स के एडल्ट कंटेंट देखते हैं। यह वयस्क ऑडियंस को टार्गेट करने का सबसे अच्छा समय है।
इस टाइम-बेस्ड व्यूइंग पैटर्न को समझे बिना आप सिर्फ डिवाइस आईडी का उपयोग करके बहुत सारा पैसा बर्बाद कर सकते हैं।
गेमिंग कंसोल: एक बिल्कुल अलग दुनिया
यहाँ हम एक और विशेष श्रेणी को देखते हैं-गेमिंग कंसोल्स जैसे PlayStation, Xbox, या Nintendo Switch। ये डिवाइस CTV के रूप में काम करते हैं, लेकिन इनका उपयोग पैटर्न बिल्कुल अलग होता है।
गेमिंग कंसोल का सबसे बड़ा अंतर यह है कि यह आमतौर पर एक व्यक्ति द्वारा लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति PlayStation पर कोई गेम खेल रहा है, तो संभावना है कि वही व्यक्ति कुछ देर बाद Netflix भी उसी कंसोल पर देखे। यह एक व्यक्तिगत डिवाइस है, न कि पूरे परिवार का साझा उपकरण। इसलिए गेमिंग कंसोल पर डिवाइस टार्गेटिंग अपेक्षाकृत सटीक हो सकती है।
लेकिन यहाँ एक समस्या है-फ्रिक्वेंसी। गेमर अक्सर एक ही सत्र में कई घंटे बिताते हैं। अगर आप उन्हें हर 15 मिनट में वही विज्ञापन दिखाते रहेंगे, तो वे न सिर्फ आपके ब्रांड से नफरत करेंगे, बल्कि विज्ञापन को ब्लॉक भी कर सकते हैं। इसलिए गेमिंग कंसोल पर फ्रिक्वेंसी कैप लगाना बहुत जरूरी है-हर 30-45 मिनट में एक बार से ज्यादा नहीं।
सिचुएशनल सेगमेंटेशन: एक नया रास्ता
इन सारी समस्याओं के बावजूद, CTV में अभी भी अपार संभावनाएं हैं। बस जरूरत है एक नए दृष्टिकोण की। मैं इसे "सिचुएशनल सेगमेंटेशन" का नाम देता हूँ। यह एक ऐसी रणनीति है जो डिवाइस आईडी को सिर्फ एक प्रारंभिक बिंदु मानती है, और फिर उसमें अतिरिक्त डेटा जोड़ती है-जैसे समय, कंटेंट का प्रकार, और ACR (Automatic Content Recognition) डेटा।
ACR डेटा क्या है? यह वह जानकारी है जो आपके स्मार्ट टीवी के माइक्रोफोन या सॉफ्टवेयर से ली जाती है कि उस समय स्क्रीन पर वास्तव में क्या चल रहा है। कई CTV प्लेटफॉर्म-जैसे Roku और Vizio-ACR डेटा एकत्र करते हैं। इस डेटा का उपयोग करके आप पता लगा सकते हैं कि उस समय कोई स्पोर्ट्स मैच चल रहा है, कोई कुकिंग शो, या कोई कार्टून।
अब कल्पना कीजिए:
- डिवाइस आईडी: Roku_ABC123
- समय: शाम 8:15 PM
- ACR डेटा: ESPN पर बास्केटबॉल मैच चल रहा है
इस कॉम्बिनेशन से मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि उस समय स्क्रीन के सामने संभवतः एक वयस्क पुरुष है जो खेलों में रुचि रखता है। यह मेरे लिए स्पोर्ट्स ड्रिंक या फैंटेसी लीग ऐप का विज्ञापन दिखाने का सही मौका है।
इसी तरह, अगर ACR डेटा बताता है कि सुबह 8 बजे Cartoon Network चल रहा है, तो मैं बच्चों के लिए टॉय या स्कूल सप्लाई का विज्ञापन दिखा सकता हूँ। यह प्रासंगिकता लाता है-विज्ञापन उस समय के वास्तविक दर्शक से मेल खाता है, न कि सिर्फ उस डिवाइस के मालिक से।
व्यावहारिक कदम: आज से क्या करें
मैं जानता हूँ कि सिद्धांत तो ठीक है, लेकिन व्यवहार में इसे लागू करना मुश्किल लग सकता है। यहाँ मैं पाँच ठोस कदम दे रहा हूँ जिन्हें आप आज से ही शुरू कर सकते हैं:
1. अपने वर्तमान सेटअप का ऑडिट करें
अपने DSP (Demand-Side Platform) में जाएँ और देखें कि आप CTV टार्गेटिंग के लिए किन विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं। अगर आप सिर्फ डिवाइस आईडी का उपयोग कर रहे हैं, तो यह एक लाल झंडा है। अपने DSP से पूछें कि क्या वे टाइम-ऑफ-डे टार्गेटिंग या कंटेंट-कैटेगरी टार्गेटिंग का समर्थन करते हैं।
2. ACR डेटा का उपयोग शुरू करें
कई CTV प्लेटफॉर्म-जैसे Roku, Amazon Fire TV, और Vizio-तीसरे पक्ष के विज्ञापनदाताओं को ACR डेटा उपलब्ध कराते हैं। अपने मीडिया पार्टनर से बात करके देखें कि क्या आप इस डेटा तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। यह आपकी टार्गेटिंग को कहीं अधिक प्रासंगिक बनाएगा।
3. डायनामिक क्रिएटिव बनाएँ
एक ही विज्ञापन के कई वर्जन बनाएँ-जैसे बच्चों के लिए एक वर्जन, वयस्कों के लिए दूसरा, परिवार के लिए तीसरा। फिर उन वर्जन को उस समय के संभावित दर्शक के अनुसार दिखाएँ। इसके लिए आपको एक डाइनैमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) प्लेटफॉर्म की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन यह निवेश के लायक है।
4. फ्रिक्वेंसी कैप लगाएँ
खासकर गेमिंग कंसोल पर, एक ही डिवाइस पर एक ही विज्ञापन को बार-बार दिखाने से बचें। हर डिवाइस के लिए एक सीमा तय करें-मसलन, प्रति घंटे एक बार से ज्यादा नहीं। इससे ब्रांड थकान (brand fatigue) कम होगी।
5. A/B टेस्ट चलाएँ
एक छोटा प्रयोग करें। एक ग्रुप में सिर्फ डिवाइस-स्तरीय टार्गेटिंग का उपयोग करें, और दूसरे ग्रुप में सिचुएशनल सेगमेंटेशन (डिवाइस आईडी + समय + कंटेंट) का। देखें कि किस ग्रुप में बेहतर क्लिक-थ्रू रेट (CTR) या कन्वर्ज़न रेट आता है। डेटा पर भरोसा करें, न कि सिर्फ अंतर्ज्ञान पर।
निष्कर्ष: डिवाइस को सिर्फ एक शुरुआत मानें
मैं यहाँ यह संदेश देना चाहता हूँ कि CTV डिवाइस टार्गेटिंग को पूरी तरह से त्यागने की जरूरत नहीं है। बल्कि, इसे एक औजार की तरह इस्तेमाल करें-एक शुरुआती बिंदु, न कि अंतिम गंतव्य। डिवाइस आईडी को संदर्भ में रखें। उसमें समय, कंटेंट, और देखने के पैटर्न को जोड़ें। तभी आप वास्तविक लोगों तक पहुँच पाएँगे, न कि सिर्फ उपकरणों तक।
अमेरिकी बाजार में जो मार्केटर्स इस अनदेखी सच्चाई को पहचान लेंगे, वे प्रतिस्पर्धियों से एक कदम आगे रहेंगे। CTV का भविष्य सिर्फ डेटा में नहीं, बल्कि उस डेटा की समझदार व्याख्या में है। और यही वह नजरिया है जो मैं आपको अपनाने की सलाह देता हूँ।
आखिरकार, आप एक CTV डिवाइस से विज्ञापन कर रहे हैं, लेकिन आपका ग्राहक एक इंसान है जो उस स्क्रीन के सामने अपने परिवार के साथ बैठा हो सकता है। उसे समझिए, सिर्फ उसकी डिवाइस को नहीं।